Sunday, January 8, 2012

हिंदी हिंद की शान है...

जय हिंद,
 समस्त आत्मीय जनों को आपके अपने गौरव शर्मा "भारतीय" की ओर से सादर प्रणाम, आदाब, सतश्री अकाल !!
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मेरा आप सभी से एक प्रश्न है कि हम अपनी मातृभाषा हिन्दी का प्रयोग न कर किसी अन्य भाषा का प्रयोग क्यों करें  ?
मित्रों, हमें अंग्रेजी बोलने में गर्व का अनुभव होता है जबकि गर्व हमें इस बात पर होना चाहिए कि अंग्रेजी के अधिकांश शब्द हमारी प्रचिनतम भाषा, देववाणी संस्कृत से लिए गये हैं और उससे भी अधिक गर्व हमें इस बात पर होना चाहिए कि दुनिया में बोली जाने वाली लगभग 14,000 बोली, भाषा और विभाषाओँ को व्याकरण के चौदह सुत्र प्रदान करने वाले महान ब्रम्हर्षि पाणनीय "भारतीय" थे...
मेरा आप सभी से निवेदन है -
हिन्दी बोलिए.
हिन्दी लिखिए..

हिन्दी पढ़िए...
  क्योंकि हिन्दी हिन्द की शान है, क्योंकि हिन्दी भारत की पहचान है, क्योँकि हिन्दी मात्र एक भाषा नहीं है वरन हिन्दी हमारी मातृभाषा है।
जय भारत, जय अभियान भारतीय...!!

Friday, October 7, 2011

दुरी बस कुछ दिनों की...


जय हिंद, 
समस्त आत्मीय जनों को आपके अपने गौरव शर्मा "भारतीय" की ओर से सादर प्रणाम, आदाब, सतश्री अकाल !!
सर्वप्रथम देरी से माफ़ी के साथ नवरात्री विजयादशमी की बधाई स्वीकार करें, तथा दीपावली की अग्रीम बधाई भी स्वीकार करें |
किंचित व्यस्तता के चलते आजकल ब्लॉग एवं ऑरकुट से थोड़ी दुरी सी बन गयी है पर मै आप सभी आशिर्वादकों, मार्गदर्शकों एवं मित्रों से कभी भी दूर नहीं हो सकता अतः आप मुझे मेरे मोबाईल न. 09301988885 तथा 09993168799 पर कभी भी संपर्क कर सकते हैं |
आशा ही नहीं वरन विशवास है की आपका स्नेह आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन पूर्व की भांति सदैव प्राप्त होता रहेगा | 
कुछ दिनों के लिए अपने गौरव को इज़ाज़त दें...

जय हिंद, जय भारत, जय अभियान भारतीय...!!

Sunday, July 10, 2011

यह कैसा विरोध ??

समस्त आत्मीय जनों को आपके अपने गौरव शर्मा "भारतीय" की ओर से सादर नमस्कार, आदाब, सतश्री अकाल !!

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का आधार होती है और यही स्वतंत्रता एक अच्छे शासन एवं प्रशासन की नीव भी होती है अतः अभिव्यक्ति का मर्यादित एवं संयमित होना भी बेहद आवश्यक है, वर्तमान समय में भारत में अमर्यादित टिप्पणियों एवं भाषणों का जैसे दौर ही चल पड़ा है और इस आग में घी का काम कर रहे हैं पक्ष विपक्ष द्वारा प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से निर्मित राजनीतिज्ञों के काल्पनिक चित्र जो आजकल चारों ओर चर्चा का विषय बने हुए हैं | देखने में आ रहा है की फेसबुक एवं ऑरकुट जैसे सोशल नेट्वर्किंग साइट्स में नेताओं के फोटोस अपलोड किये जा रहे हैं जो की पुर्णतः काल्पनिक हैं जिन्हें भ्रष्टाचार एवं कुशाशन का विरोध दर्ज करने के उद्देश्य से ही अपलोड किये जा रहे हैं पर ये चित्र इतने अश्लील और अमर्यादित हैं की इन्हें देखकर कोई भी शर्म से लाल हो जाए | विरोध अगर मर्यादित हो, संयमित हो विश्वसनीय हो तभी वह सार्थक होता है अन्यथा उसका प्रतिकूल प्रभाव समाज एवं देश पर पड़ने लगता है आज ऐसा ही कुछ मुझे अपने देश में होता नजर आ रहा है जो घोर आपत्तिजनक है | भारत जैसे देश में जहाँ नारी की पूजा की जाती है वहां किसी भी नारी का अपमान किया जाना कहाँ तक जायज है साथ ही हम उन देशभक्तों का भी अपमान कर रहे हैं जो हमारे लिए दिनरात अनशन कर रहे हैं और जिनपर सच कहने की वजह से लाठियों भांजी जा रही हैं|
            कोई किसी के खिलाफ मर्यादाविहीन बातें कहता है तो दूसरा उससे भी असंयमित  भाषा में जवाब देता है और यह प्रक्रिया निरंतर बनी हुई है कई बात तो ऐसा प्रतीत होता है मानो मर्यादाविहीन बातों की प्रतियोगिता करायी जा रही हो | मेरा उद्देश्य किसी की आलोचना करना या समर्थन करना नहीं वरन भारतीय लोकतंत्र के मर्यादाओं को लगातार तार तार करती राजनीतिज्ञों की बोलियों एवं ऐसे मर्यादाविहीन चित्रों का प्रयोग कर विरोध दर्ज कराने की इस कुप्रथा को पोषित और पल्लवित होने से रोकना है क्योंकी हमारी संस्कार, हमारी संस्कृति और हमारी सभ्यता ही हमारी धरोहर है और अगर हम इस धरोहर की रक्षा नहीं कर सके तो निश्चित ही हमारी स्थिति अकल्पनीय होगी  अतः मै समस्त आत्मीय जनों से अनुरोध करता हूँ की जाने अनजाने में ऐसे मर्यादाविहीन चित्रों का ना प्रयोग करें और न ही इसका समर्थन करें........जय हिंद जय भारत !!

Sunday, June 12, 2011

मनोज भैया को जन्मदिन की बधाई...

समस्त आत्मीय जनों को आपके अपने गौरव शर्मा "भारतीय" की ओर से सादर नमस्कार, आदाब, सतश्री अकाल !!

                       यूँ तो मेरे लिए हर दिन खास होता है पर आज का दिन मेरे लिए और भी खास है, आज मेरे प्रेरणाश्रोत, मेरे मार्गदर्शक आदरणीय मनोज कंदोई जी का जन्मदिवस है | मनोज भैया जिनका आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन हमें हमेशा मिला करता है जिनसे हमें सकारात्मक ऊर्जा और अभूतपूर्व उत्साह की प्राप्ति होती है उन्हें आज के इस अवसर पर मै ढेर सारी बधाई एवं उनके स्वस्थ, दीर्घायु जीवन एवं उज्जवल भविष्य के लिए अशेष शुभकामनायें प्रेषित करता हूँ | वर्तमान में मनोज भैया रायपुर नगर के सर्वाधिक प्रतिष्ठित स्वामी विवेकानंद वार्ड के पार्षद एवं राजस्व विभाग नगर निगम रायपुर के अध्यक्ष हैं, आदरणीय मनोज भैया ने आर्थिक, सामाजिक एवं राजनैतिक क्षेत्रों में अपने सरल व्यवहार एवं कुशल नेतृत्व क्षमता के चलते जो लोकप्रियता हासिल की है वह वाकई काबिलेतारीफ है, विरोधी भी जिनके गुणों के कायल हैं ऐसे आदरणीय मनोज भैया अपने जादुई व्यकतित्व के चलते ही नगर के लोकप्रिय एवं प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधियों की गिनती में अग्र पंक्ति में गिने जाते हैं |
                         वर्तमान समय में जब राजनीती और राजनीतिज्ञों पर न जाने कैसे कैसे सवाल उठ रहे हैं ऐसे समय में आदरणीय मनोज भैया ने अपने स्वच्छ छवि के माध्यम से यह साबित किया है की प्रत्येक राजनीतिज्ञ एक जैसा नहीं होता और आज भी राजनीती में स्वच्छ छवि के कर्मठ व्यक्ति मौजूद हैं जिनमे अपने नगर, अपने प्रदेश और अपने देश के लिए कार्य करने का जज्बा है | आडम्बर से कोशों दूर रहने वाले आदरणीय मनोज भैया सदैव सादगी और संजीदगी से अपना जीवन व्यतीत करते हैं, विपरीत परिस्थितयों का धैर्य के साथ सामना करने का स्वभाव वाकई उन्हें दूसरों से अलग करता है | जनता के दुःख दर्द और उनके परेशानियों को हल करने के लिए आदरणीय मनोज भैया सदैव तत्पर रहते हैं और मैंने शायद ही कभी ऐसा देखा हो की कोई भी व्यक्ति जो अपने किसी काम के लिए उनके पास गया हो और निराश होकर लौटा हो  वे हमेशा आम जनता की हरसंभव मदद के लिए तैयार रहते हैं | वर्तमान में जब राजनीती में अच्छे लोगों की कमी महसूस की जाने लगी हैं ऐसे समय में उदार ह्रदय के सरल और सुलभ राजनीतिज्ञ का होना वाकई सुखद है | 
मै पुनः इश्वर से कामना करता हूँ की आदरणीय भैया मनोज कंदोई जी को स्वस्थ, दीर्घायु जीवन एवं उज्जवल भविष्य प्रदान करें एवं आदरणीय मनोज भैया को यह विश्वास दिलाता हूँ की हर कदम पर हम आपके साथ हैं पुनः जन्मदिन की ढेर सारी बधाई एवं अशेष शुभकामनायें ..... 
बार बार दिन ये आये 
बार बार दिल ये गाये 
आप जियो हजारों साल ये मेरी है आरजू ...

Sunday, May 22, 2011

अपमान तिरंगे का............ आखिर दोषी कौन ?

समस्त आत्मीय जनों को आपके अपने गौरव शर्मा "भारतीय" की ओर से सादर प्रणाम....
                         आज बड़े दिनों के बाद आप सब के समक्ष उपस्थित होने का अवसर मिला है, देरी के लिए माफ़ी चाहता हूँ | 
{ऐसे शर्मनाक हरकतों को अंजाम देते समय कहाँ चली जाती है हमारी देशभक्ति }
             तिरंगा..........जो हमारा राष्ट्रध्वज है, हमारी आन बान और शान का प्रतिक है, किसी भी देश का राष्ट्रध्वज उस देश के मान सम्मान और अस्मिता का प्रतिक होता है,  वह केवल ध्वज नहीं वरन देशवासियों के भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है | पर बाअफ़सोस मुझे आज कहना पड़ रहा है की हम उसी तिरंगे के सम्मान करने के लायक नहीं रह गए हैं, हमारी देशभक्ति की भावना केवल राष्ट्रीय पर्वों में ही जागृत होती है और हम बड़े शान से तिरंगे से अपने चौक चौराहे और नगर को पाट देते हैं और राष्ट्रीय पर्वों के बाद..........हमारी देशभक्ति, हमारी राष्ट्रीयता की भावना न जाने कहाँ गुम हो जाती है और हम गाहे बगाहे उसी तिरंगे का अपमान करते फिरते है जिसे हमने ही बड़े शान से लगाया है |
{जरा सोचिये क्या वाकई हम "भारतीय" कहलाने के लायक है ?}
              समस्त आत्मीय जनों को मै बताना चाहता हूँ यह तस्वीर कल मैंने अपने नगर रायपुर के एक प्रतिष्ठित माने जाने वाले इलाके से ली है जहाँ मुक्कड़ पर भारत के राष्ट्रध्वज को बड़ी संख्या में आपत्तिजनक स्थिति में डाल दिया गया था | इसकी सुचना जब हमने खबर छत्तीसी ब्लॉग न्यूज़ {http://khabarchhattisi.blogspot.com/} एवं स्थानीय प्रशासन को दी तो उन्होंने इसे बड़ी तत्परता के साथ मुक्कड़ से उठाया | मै स्थानीय पार्षद महोदय एवं नगर निगम के अधिकारीयों को इसके लिए साधुवाद देता हूँ | प्रश्न यह है की आखिर राष्ट्रध्वज को मुक्कड़ में डालने का घिनौना हरकत कोई भी व्यक्ति कर कैसे सकता है ? क्या हमारी देशभक्ति मर गयी है या हमारी आस्था अब भारत में नहीं रह गयी है ? ऐसी तस्वीरें आजकल कमोबेश हर जगह आसानी से देखी जा सकती है |
                  जाने अनजाने में तिरंगे का अपमान हो रहा है कोई राष्ट्र ध्वज को मुक्कड़ में फेक रहा है तो कोई तिरंगे वाला केक काट रहा है | हमें इस बात पर अवश्य विचार करना चाहिए की आखिर ऐसा होता क्यों है ? आखिर क्यों हम राष्ट्र ध्वज को व्यवसाय का रूप देने में लगे हुए हैं ? मेरा शाशन प्रशासन में बैठे जिम्मेदार लोगों से यह प्रश्न है की आखिर क्यों हम कागज और झिल्लियों में बने तिरंगे पर पूर्ण प्रतिबन्ध नहीं लगाते जिससे इस प्रकार राष्ट्र ध्वज के अपमान को रोका जा सके ? साथ ही मै आम जन से भी विनम्र अपील करना चाहता हूँ की "मित्रों, तिरंगा हमारी आन बान और शान है और इसका स्थान सबसे ऊंचा ही अभीष्ट है. बेशक हम इसका इस्तेमाल गर्व से करें यह हमारा अधिकार है. लेकिन इसे इसे गर्व के साथ रखें भी, क्योंकि यही हमारा कर्तब्य है."
जयहिंद

Saturday, April 23, 2011

पर हमने भारत को क्या दिया....?

समस्त आत्मीय जनों को आपके अपने गौरव शर्मा "भारतीय" के ओर से सादर प्रणाम !!
                       विगत दिनों मेरी बातचीत "भारत" एवं "भारतीयता" के विषय में नेट पर मित्रों से हो रही थी तभी एक मित्र ने मुझसे कहा यार जब देखो तुम केवल देश की ही बातें किया करते हो आखिर इस देश ने हमें दिया ही क्या है ? मित्र की इस बात को सुनकर मुझे तो ऐसा लगा मानो काटो तो खून नहीं, मै उचित जवाब उन्हें दे पाता इससे पहले ही किंचित कारणों से उनसे मेरी वार्तालाप बंद हो गयी | आज मन में विचार आया की न केवल उस परम मित्र को वरन ऐसा ही सोच रखने वाले लोगों को भी बताया जाये की भारत ने हमें क्या दिया है |
                      "भारत" जो "भाष" अर्थात प्रकाश की साधना में रत है, "भारत" जो न केवल भूमि का एक टुकड़ा है, "भारत" जो न केवल लोगों का एक समूह है,  "भारत" जो न केवल नदियों का संगम है, "भारत" जो न केवल एक राष्ट्र है वरन "भारत" हमारी आत्मा है, "भारत" हमारी भावना है, "भारत" हमारा प्राण है, "भारत" हमारी संस्कृति है, "भारत" हमारा संस्कार है, "भारत" हमारी आस्था, हमारी श्रद्धा, हमारी अस्मिता का प्रतिक है, "भारत" जो देश है अर्पण का,  "भारत" जो देश है तर्पण का, "भारत" जो देश है समर्पण का, "भारत" जो न केवल हमारा अभिमान है वरन "भारत" हर भारतीय की पहचान है,  "भारत" जो अनूठी संस्कृतियों का अनुपम मेल है, "भारत" जहाँ दो कोष में भाषा बदल जाती है और चार कोष में वेशभूषा बदल जाती है मगर फिर भी अनेकता में एकता की भारत से बढ़कर कोई मिशाल नहीं है, "भारत" वह देश जहाँ भगत सिंह फांसी के तख्ते को देश की आजादी के लिए हँसते हँसते चूम लेते हैं, "भारत" वो देश जहाँ चंद्रशेखर आज़ाद देश की अस्मिता के रक्षा के लिए आखिरी गोली खुद पर ही चला लेते हैं, "भारत" जहाँ जन्म लेना ही असीम गौरव का विषय है और ऐसे महान देश के विषय में आज हम कहते हैं की भारत ने हमें क्या दिया ? 
                            मित्रों आज हम यह प्रश्न करने के लिए भी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, हमें ज्ञात होना चाहिए की विश्व में बोली जाने वाली लगभग चौदह हजार बोली, भाषा, और विभाषाओं को व्याकरण के चौदह सूत्र प्रदान किया महान ऋषि पाणनिय ने, जो "भारतीय" थे,  "भारत" जिसने धर्म और आध्यात्म के क्षेत्र में सम्पूर्ण विश्व को राह दिखाया है, विवेकानंद "भारतीय" थे जिन्होंने विश्व को धर्म की नवीन परिभाषा प्रदान की, शुन्य जिसकी खोज भारत से हुई जिसके बदौलत हमारा आज चाँद सितारों पर जाना मुमकिन हो पाया है याद करें आर्यभट "भारतीय" थे,  सत्य और अहिंसा की राह पर चलने का मार्ग जिन्होंने दुनिया के लिए प्रशस्त किया वे गाँधी जी "भारतीय" थे,  स्वास्थ्य एवं चिकत्सा के क्षेत्र में सर्वप्रथम पहल कर दुनिया को राह दिखाने वाले महान विद्वान धन्वन्तरी और चरक "भारतीय" थे |
                        मित्रों भारत के योगदान के विषय में हम जितना लिखें, जितना पढ़ें, जितना जानें, भारत के योगदान का जितना बखान करें वह कम है क्योंकि भारत विश्वगुरु के पद पर सदैव आसीन रहा है और गुरु का ज्ञान सदैव असीमित होता है, अपार होता है | पर अगर कोई व्यक्ति अपने गुरु को संदेह की दृष्टि से देखता है, उसकी क्षमताओं पर शक करता है तो मेरा मानना है की वह अपने विकास को अवरुद्ध करने की ओर पहला कदम रखता है और पतन की ओर अग्रसर होता है, हम कदापि ऐसा कृत्य न करें | बड़ा दुःख होता है जब कोई इस प्रकार का प्रश्न करता है की भारत ने हमें क्या दिया वह भी अगर देश का कोई भावी कर्णधार, कोई युवा कहता है तो वाकई बेहद पीड़ा होती है | ऐसे बेतुके प्रश्न करने वाले यह क्यों नहीं सोचते की "हमने भारत को क्या दिया है" अधिकार तो हमें याद रहता है पर अपने कर्तव्य हम भूल जाते हैं | जाने अनजाने में ही हम अपने देश अपने मातृभूमि का अपमान करते हैं और गर्व से अपने को "भारतीय" कहते फिरते हैं | जरा सोचिये क्या हम वाकई "भारतीय" कहलाने के लायक भी हैं ? मित्रों मेरी नजर में तो "भारतीय" वही है जो "भारत" को जानता है, "भारत" को पहचानता है और "भारत" को मानता है |      
                                               ***जय  हिंद जय भारत***               

Saturday, April 16, 2011

भारत रत्न कौन........?

 समस्त आत्मीय जन गौरव का सादर अभिवादन स्वीकार करें|
{सभी चित्र गूगल से साभार}
                   
            "भारत रत्न" देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान, जिसे प्राप्त करने की इच्छा हर भारतीय के दिल में होती है | पिछले कुछ दिनों से विभिन्न स्तरों पर विभिन्न व्यक्तियों एवं संस्थाओ के द्वारा लगातार यह मांग की जा रही है की क्रिकेट के बेताज बादशाह सचिन तेंडुलकर{आजकल इन्हें क्रिकेट के भगवान् भी कहा जाने लगा है}को शीघ्रातिशीघ्र "भारत रत्न" सम्मान प्रदान किया जाये और इस मांग पर शाशन के द्वारा भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है | बेशक यह मांग जायज है और निश्चित रूप से सचिन तेंडुलकर इस सम्मान के हकदार भी हैं | उन्होंने जिस प्रकार अपने खेल जीवन में देश के लिए खेलते हुए जितनी उपलब्धियां हासिल की हैं तथा क्रिकेट जगत के अधिकाधिक रिकार्ड अपने नाम किये हैं वह वाकई प्रसंसनीय है | पर क्या हमें सचिन के अतिरिक्त "भारत रत्न" सम्मान हेतु अन्य नामों पर विचार नहीं किया जाना चाहिए ? क्या सचिन से पहले भारत के अन्य विभूतियों को इस सम्मान से नहीं नवाजा जाना चाहिए ? बेशक सचिन को "भारत रत्न" सम्मान दिया जाना चाहिए परन्तु सचिन तेंडुलकर से पूर्व "भारत रत्न" माँ भारती के उन सपूतों को प्रदान किया जाना चाहिए जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर माँ भारती के चरणों में प्राण त्याग दिए |
                           मित्रों जरा विचार कीजिये क्या "भारत रत्न" सम्मान पर पहला अधिकार उस शहीद भगत सिंह का नहीं है जिन्होंने सम्पूर्ण भारत वर्ष को क्रांति की नविन परिभाषा दी जिन्होंने फांसी के फंदे को ख़ुशी ख़ुशी चूमकर देश के लाखों करोड़ों नौजवानों को देशभक्ति का पाठ पढ़ा दिया ?  जरा सोचिये क्या "भारत रत्न" सम्मान पहले भगत सिंह को दिया जाना चाहिए अथवा किसी अन्य को, आज़ादी के इतने वर्षों तक क्यों हम माँ भारती के वीर सपूतों को यह सम्मान नहीं दे पाए उल्टा आजकल कुछ राजनीतिज्ञों द्वारा इन शहीदों की जातियों पर पर तरह तरह की बातें की जाने लगी है जरा सोचिये क्या यह न्यायोचित है ?
                 नेताजी शुभाष चन्द्र बोस को "भारत रत्न" सम्मान देने हेतु भारत की जनता द्वारा क्या मांग नहीं की गयी फिर क्यों नेताजी आजतक इस सम्मान से वंचित हैं ? क्या इस सम्मान पर उनका अधिकार पहले नहीं है ?  माँ भारती के इन वीर सपूतों के प्रति हमारा इतना उदासीन रुख क्यों ? बेशक हमारे शहीद किसी सम्मान के मोहताज़ नहीं पर क्या शाशन, प्रशाशन का यह कर्त्तव्य नहीं की इन शहीदों को सर्वप्रथम देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया जाये | निश्चित रूप से शाशन प्रशासन की इस लापरवाही में हम भी उतने ही जिम्मेदार हैं, आज जितने शिद्दत से हम सचिन तेंडुलकर या अन्य किसी के लिए "भारत रत्न" की  मांग करते हैं क्या हमने अपने इन वीर शहीदों के लिए ऐसा किया है ?
                           मेरा उद्देश्य किसी का विरोध करना अथवा समर्थन करना नहीं वरन उन लोगों का ध्यान इन महान विभूतियों की ओर आकृष्ट करना है जिन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान "भारत रत्न" हेतु केवल एक ही नाम याद रहता है | ये मेरी भावनाएं हैं जिन्हें मैंने आपके समक्छ अभिव्यक्त किया है और मै समस्त आत्मीय जनों से इसपर उनके विचार सादर आमंत्रित करता हूँ |
                                                        ***जय हिंद जय भारत***